किसी देश की अर्थव्यवस्था में ग्रामीण जनसँख्या की आय का विशिष्ट महत्त्व होता है देश के सकल घरेलु उत्पाद में कृषि,पशुपालन,डेयरी जैसे लघु उद्योग,इन्ही ग्रामीण इलाकों में फलते फूलते है यही इनका पोषण होता है करीब ७०% श्रम ग्रामीण परिवेश में है. किसानो के कर्जमाफी और रोजगार गारंटी कानून से ग्रामीण अर्थव्यथा पटरी पर लोटी है
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मंगलवार, 24 मार्च 2020
Indian Economy and Rural Management
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बुधवार, 28 अक्टूबर 2015
भारतीय अर्थव्यवस्था
भारतीय अर्थव्यवस्था में अभी बुरे दिन चल रहे हैं.खाद्य प्रदार्थों में खासकर प्याज और दाल के मुल्यों नें अप्रत्याशित छलांग लगायी है.आखिर एैसी क्या वजह है जो कि मनमोहन सिंह जी के १७ महीनें गद्दी छोड़ने के बाद ही एैसी परिस्थति निर्मित हो गई,जिनके कारण वस्तुओं के मुल्य नियंत्रण से बाहर हो गये है.हालांकि मनमोहन सिंह जी के कार्यकाल में देश मंदी के दौर से गुजर चुका है,फिर भी दाम,मंहगाई ने चरम सीमा नही लांघी थी.कारण जो भी हो लेकिन इस मुद्दे पर सरकार बैक फुट पर है जहां तक आम जनता की सोंच यह है कि अल्पवर्षा,और जमाखोंरो की वजह से दाल,के मुल्य बढ़े है.हाल ही के दिनों में छापेमारी की कार्यवाही मे ब्यापक पैमाने में जप्त की गई दालें,इसका सबूत है.
सरकार का यह कर्तव्य है कि जमाखोरों के विरूद्ध कड़े कानून बनाये,और उसे सख्ती से लागु करे.
सरकार का यह कर्तव्य है कि जमाखोरों के विरूद्ध कड़े कानून बनाये,और उसे सख्ती से लागु करे.
#NEPAL #BHARAT RELATION
मंगलवार, 29 सितंबर 2015
#BHARAT-NEPAL RELATION
भारत नेपाल मैत्री सम्बन्ध का इतिहास बहुत पुराना है। मोदी सरकार ने नेपाल की आपदा में बढ़- चढ़ कर आर्थिक सहायता पहुंचाई ,चीन ने भी नेपाल के पुनर्निर्माण सराहनीय मदद की,जिससे दोनों देशो के रिश्ते प्रगाढ़ हुवे,नेपाली और चीनी जनता के मध्य सहयोग बढ़ा,शायद यही से नेपाल -भारत के रिश्ते में कडुवाहटशुरू हुई। चीन की ओऱ नेपाल का ज्यादा उदार होना स्वाभाविक है कि भारत नागुवार होगा। हिन्दुस्तान का नेपाल के साथ सांस्कृतिक संबंध है. विश्व का एक मात्र हिन्दू राष्ट्र होने का अस्तित्व मिटता देख,भारत बेचैन है साथ ही ही नेपाल के तराई छेत्रो के मधेसिओ की हित की चिंता है जो संविधान में अपना प्रतिनिधित्व की की मांग लगातार कर रहे है,जिनका भारत समर्थन करता उम्मीद है उनकी ज़ायज़ मांगें सरकार मान लेगी और भारत -नेपाल के रिश्ते पहले जैसे सामान्य हो जायेंगे।
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